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Chapter 2 - अध्याय 2: भगवान नहीं, बस एक आम नागरिक

अध्याय 2: भगवान नहीं, बस एक आम नागरिक

​जंगल से बाहर निकलते-निकलते विक्रम को कई घंटे बीत चुके थे। अजीब बात यह थी कि भले ही उसने 'ओरिजिन जीन' खा लिया था, लेकिन उसकी थकान पूरी तरह नहीं मिटी थी। इस नई दुनिया का गुरुत्वाकर्षण (Gravity) इतना ज्यादा था कि सिर्फ चलने में ही उसकी काफी ऊर्जा खर्च हो रही थी।

​अचानक, पेड़ों की कतार खत्म हुई और उसके सामने एक विशाल मैदान आ गया।

​सामने का नज़ारा देखकर विक्रम की आँखें फटी की फटी रह गईं। कुछ दूरी पर एक छोटा सा कस्बा (Town) दिखाई दे रहा था। लेकिन यह कोई साधारण कस्बा नहीं था। वहाँ की इमारतें हवा में तैर रही थीं और विशालकाय पत्थरों से बनी थीं।

​विक्रम अभी नज़ारा देख ही रहा था कि उसे पीछे से किसी के कदमों की आहट सुनाई दी।

​"कौन हो तुम?" एक भारी आवाज़ गूंजी।

​विक्रम तेजी से पलटा। उसके सामने दो लोग खड़े थे। उन्होंने चमड़े का साधारण सा कवच पहना था और उनके हाथों में लंबी भाले जैसी छड़ें थीं। वे दिखने में इंसान जैसे ही थे, लेकिन उनकी त्वचा से हल्की नीली रोशनी निकल रही थी।

​विक्रम ने सतर्क होकर जवाब दिया, "मैं... मैं एक यात्री हूँ। रास्ता भटक गया हूँ।"

​उनमें से एक आदमी, जो कद में लगभग 7 फीट लंबा था, हंसा। "यात्री? तुम्हारे कपड़े और यह कमजोर शरीर बता रहा है कि तुम अभी-अभी 'लोअर वर्ल्ड' (निचली दुनिया/Sanctuary) से आए हो।"

​विक्रम को यह सुनकर झटका लगा। क्या उन्हें पता है कि वह कहाँ से आया है?

​दूसरे आदमी ने अपनी छड़ विक्रम की ओर की। "चलो देखते हैं कि 'निचली दुनिया' का 'भगवान' कितना ताकतवर है।"

​विक्रम को यह चुनौती पसंद नहीं आई। उसने सोचा, "भले ही मैं यहाँ नया हूँ, लेकिन मैं उस दुनिया का सबसे ताकतवर योद्धा था। मैं इन्हें आसानी से हरा सकता हूँ।"

​विक्रम ने अपनी सबसे तेज गति का इस्तेमाल किया। उसने 'फिनिक्स तकनीक' (Phoenix Technique) का उपयोग करते हुए एक पल में उस आदमी के पीछे पहुँचने की कोशिश की और उसकी गर्दन पर हाथ से वार किया। यह वार इतना तेज था कि पिछली दुनिया में इससे पहाड़ टूट जाते।

​धड़ाम!

​लेकिन जो हुआ, उस पर विक्रम को विश्वास नहीं हुआ।

​उस आदमी ने बिना पीछे मुड़े, केवल अपना बायां हाथ उठाया और विक्रम के वार को हवा में ही रोक लिया। विक्रम का हाथ उस आदमी की हथेली से टकराकर सुन्न हो गया, जैसे उसने किसी अविनाशी धातु पर वार किया हो।

​"क्या? इसने मेरा वार रोक लिया?" विक्रम के पसीने छूट गए।

​वह आदमी धीरे से मुड़ा और मुस्कुराया। "तुम्हारी तकनीक अच्छी है, बच्चे। लेकिन तुम्हारी ताकत... बहुत कम है।"

​उसने विक्रम का हाथ झटक दिया। उस झटके में इतनी ताकत थी कि विक्रम 10 मीटर दूर जाकर गिरा। उसके फेफड़ों से हवा निकल गई।

​"यह कैसे हो सकता है?" विक्रम ने धूल झाड़ते हुए सोचा। "मैं एक 'ट्रू गॉड' (True God) स्तर का योद्धा हूँ। और यह आदमी... यह तो सिर्फ एक पहरेदार लग रहा है।"

​लंबे आदमी ने अपनी छड़ नीचे की और विक्रम के पास आया। उसने हाथ बढ़ाकर विक्रम को उठाया।

​"हैरान मत हो," उस आदमी ने शांत स्वर में कहा। "जिस जगह से तुम आए हो, वहाँ तुम खुद को 'भगवान' या 'देवता' मानते होगे। तुमने पूरी दुनिया पर राज किया होगा। लेकिन यहाँ, इस 'ओरिजिन यूनिवर्स' में..."

​उसने चारों ओर इशारा किया।

​"...वह शक्ति जिसे तुम 'दैवीय शक्ति' (God Power) कहते हो, यहाँ जीने के लिए बुनियादी ज़रूरत है। यहाँ पैदा होने वाला हर बच्चा उस स्तर की शक्ति के साथ पैदा होता है जिसे तुम अपनी दुनिया में 'सुपर जीन' या 'अंतिम स्तर' मानते थे।"

​विक्रम सन्न रह गया।

​"तो... मैं यहाँ क्या हूँ?" विक्रम ने धीरे से पूछा।

​"यहाँ?" आदमी ने हंसते हुए कहा, "यहाँ तुम एक 'आम नागरिक' (Commoner) से भी नीचे हो। तुम अभी एक 'नवजात' (Newborn) हो। यहाँ का एक साधारण किसान भी तुमसे ज्यादा भारी वजन उठा सकता है।"

​विक्रम ने अपनी मुट्ठी भींच ली। निराशा की जगह उसकी आँखों में एक नई चमक आ गई थी। यह अपमान नहीं था, यह एक चुनौती थी।

​उसने सोचा, 'तो इसका मतलब है कि विकास की कोई सीमा नहीं है। अगर यहाँ का आम आदमी मेरे पिछले स्तर के बराबर है, तो सोचो यहाँ का 'अभिजात वर्ग' (Elite) कितना ताकतवर होगा। मुझे वह बनना है।'

​"मेरा नाम विक्रम है," उसने उस आदमी से कहा, अपनी रीढ़ सीधी करते हुए। "मुझे बताओ, मैं मजबूत कैसे बन सकता हूँ?"

​पहरेदार ने विक्रम के जज्बे को देखा और सिर हिलाया। "सबसे पहले, तुम्हें 'जीन टैक्स' चुकाना होगा शहर में घुसने के लिए। अगर पैसे नहीं हैं, तो हमारे साथ खदान (Mine) में काम करना होगा।"

​विक्रम मुस्कुराया। "मंजूर है।"

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