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Chapter 6 - अध्याय 6: खेल पलट गया (The Tables Turn)

अध्याय 6: खेल पलट गया (The Tables Turn)

​खदान में सन्नाटा छाया हुआ था। केवल मशालों की चटकने की आवाज़ और पहरेदारों के भारी जूतों की धमक सुनाई दे रही थी।

​पहियों वाली एक अजीब सी मशीन लेकर मुख्य पहरेदार (Captain) आगे बढ़ा। यह एक 'ओरिजिन डिटेक्टर' था—एक ऐसा यंत्र जो ताजी 'ओरिजिन ऊर्जा' के निशान सूंघ सकता था।

​"जिसने भी पत्थर चुराया है, वह खुद आगे आ जाए," कैप्टन ने गरजते हुए कहा। "अगर मशीन ने तुम्हें पकड़ा, तो मौत बहुत दर्दनाक होगी।"

​विक्रम लाइन में सिर झुकाए खड़ा था, लेकिन उसका दिमाग शांत था। उसने अभी-अभी आचार्य यू से जो 'लो-ब्रीदिंग' (Low-Breathing) तकनीक सीखी थी, उसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उसने अपने शरीर के अंदर की ऊर्जा को बाहर निकलने से रोक दिया और अपनी धड़कनों को इतना धीमा कर लिया कि वह एक मरे हुए आदमी जैसा महसूस होने लगा।

​मशीन बीप करती हुई मजदूरों के पास से गुजरी। जैसे ही वह विक्रम के करीब आई, उसकी बत्ती लाल होकर फड़फड़ाने लगी।

​कैप्टन रुका। उसकी नज़रें विक्रम पर गड़ गईं। "तुम... इधर आओ।"

​सुपरवाइजर, जो थोड़ी दूर खड़ा था, क्रूरता से मुस्कुराया। "मैंने कहा था न कैप्टन! यह नया लड़का बहुत चालाक है। जरूर इसी ने कुछ गड़बड़ की होगी।"

​विक्रम का दिल एक पल के लिए रुक गया, लेकिन उसने अपना चेहरा डर से भरा हुआ बनाया। वह घुटनों के बल गिर गया।

​"मालिक! मैंने कुछ नहीं किया!" विक्रम गिड़गिड़ाया, लेकिन उसकी आवाज़ इतनी तेज़ थी कि सब सुन सकें। "मुझे वो चमकता हुआ पत्थर मिला था... मैंने तुरंत सुपरवाइजर साहब को दे दिया था!"

​सबकी नज़रें सुपरवाइजर पर घूम गईं।

​सुपरवाइजर का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। "बकवास बंद कर! तूने मुझे जो दिया था वो धूल थी! वो एक खाली पत्थर (Depleted Stone) था!"

​विक्रम ने अपनी आँखों में आंसू लाने का नाटक किया। "खाली? लेकिन साहब... जब मैंने आपको दिया था, तो वो नीली रोशनी से चमक रहा था। आपने उसे हाथ में लिया... और फिर वो धूल बन गया। मुझे लगा... मुझे लगा कि आपने अपनी शक्ति से उसे सोख लिया है!"

​विक्रम का तीर निशाने पर लगा। खदान में यह बात आम थी कि उच्च स्तर के योद्धा पत्थरों को छूकर उनकी ऊर्जा खींच सकते हैं।

​कैप्टन ने अपनी मशीन सुपरवाइजर की ओर घुमाई।

​सुपरवाइजर घबरा गया। "नहीं, यह झूठ बोल रहा है! मैं ऐसा क्यों करूँगा? मेरे पास अपने कोटे के पत्थर हैं!"

​लेकिन मशीन ने सुपरवाइजर के जूतों और हाथों के पास आते ही जोर-जोर से सायरन बजाना शुरू कर दिया।

​हकीकत यह थी कि जब विक्रम ने पत्थर को 'कचरा' बनाकर दिया था, तो उसकी थोड़ी बहुत बची-खुची ऊर्जा धूल (residue) के रूप में सुपरवाइजर के हाथों और जूतों पर चिपक गई थी। विक्रम ने खुद को 'साफ' कर लिया था, लेकिन सुपरवाइजर ने नहीं।

​कैप्टन की आँखों में खून उतर आया। "तो तुमने एक 'हाई-ग्रेड' पत्थर को निजी इस्तेमाल के लिए चुराया और उसका रिकॉर्ड मिटाने के लिए उसे यहीं नष्ट कर दिया? और इल्जाम इस नए लड़के पर लगा रहे हो?"

​"नहीं! यह फंसा रहा है मुझे! इसकी बातों में मत आइए!" सुपरवाइजर चिल्लाया, लेकिन तब तक दो पहरेदारों ने उसे पकड़ लिया था।

​"इसे ले जाओ," कैप्टन ने आदेश दिया। "इसे 'काली कोठरी' (Black Cell) में डालो। पूछताछ बाद में होगी।"

​सुपरवाइजर को घसीटते हुए ले जाया गया। वह गालियां बक रहा था और विक्रम को मारने की धमकी दे रहा था। विक्रम डरने का नाटक करते हुए जमीन पर दुबका रहा।

​जब शोर थम गया और पहरेदार चले गए, तो विक्रम धीरे से खड़ा हुआ और अपनी धूल झाड़ी। उसके चेहरे पर अब डर नहीं, बल्कि एक ठंडी मुस्कान थी।

​आचार्य यू, जो यह सब तमाशा देख रहे थे, धीरे से उसके पास आए।

​"खतरनाक," आचार्य यू ने बुदबुदाया। "तुमने सिर्फ अपनी जान नहीं बचाई, बल्कि अपने दुश्मन को भी रास्ते से हटा दिया। तुम एक 'योद्धा' से ज्यादा एक 'राजनीतिज्ञ' लगते हो।"

​विक्रम ने आचार्य की ओर देखा। "इस दुनिया में, जो कमजोर है उसे दिमाग का इस्तेमाल करना पड़ता है, आचार्य। अब... उस 'ब्लड-क्रिस्टल सूत्र' के बारे में बताओ। सुपरवाइजर के जाने के बाद हमारे पास कुछ दिन की शांति होगी।"

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