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Chapter 10 - अध्याय 10: छाया का शिष्य (Disciple of the Shadow)

अध्याय 10: छाया का शिष्य (Disciple of the Shadow)

​विक्रम ने उस महिला की आँखों में देखा। उसकी आँखें ठंडी और क्रूर थीं, एक शिकारी की तरह जो अपने शिकार के साथ खेल रहा हो। विक्रम जानता था कि अगर उसने अभी कोई गलत कदम उठाया, तो वह और आचार्य यू दोनों पल भर में मारे जाएंगे। उसके शरीर में अब एक उंगली हिलाने की भी ताकत नहीं बची थी।

​तो उसने अपना सबसे बड़ा हथियार निकाला—उसका अभिनय।

​विक्रम के चेहरे से तनाव गायब हो गया। उसने अपनी आँखों में एक गहरी उदासी और सम्मान का भाव भर लिया। उसने धीरे से अपना सिर झुकाया, जैसे वह किसी उच्च शक्ति के सामने समर्पण कर रहा हो।

​"मेरी धृष्टता क्षमा करें, माय लेडी," विक्रम ने कमजोर आवाज़ में कहा। "मैं कोई साधारण गुलाम नहीं हूँ। मैं... 'छाया संप्रदाय' (Shadow Sect) का एक अभागा शिष्य हूँ।"

​महिला की भौंहें तन गईं। उसने चाबुक को थोड़ा ढीला किया। "छाया संप्रदाय? मैंने ऐसे किसी संप्रदाय के बारे में नहीं सुना। तुम झूठ बोल रहे हो।"

​"यह एक छोटा और गुप्त संप्रदाय था, जो अब नष्ट हो चुका है," विक्रम ने तुरंत कहानी गढ़ी। "मेरी साधना (Cultivation) गलत हो गई थी। 'वॉयड आर्ट्स' का अभ्यास करते समय मेरी नसें फट गईं और मैं अपनी सारी शक्ति खो बैठा। मैं इस दुनिया में भटकता हुआ यहाँ आ पहुँचा और इन खदान मालिकों ने मुझे गुलाम बना लिया।"

​उसने अपनी बांह ऊपर की, जहाँ 'वॉयड स्लेश' का इस्तेमाल करने के कारण उसकी नसें काली पड़ गई थीं (जो वास्तव में ऊर्जा के अतिप्रवाह/Overload का निशान था)।

​"देखिए," विक्रम ने दर्द का नाटक करते हुए कहा। "वह तकनीक... वह मेरी आखिरी बची हुई जीवन शक्ति थी। अब मैं खाली हूँ।"

​महिला ने उसकी काली पड़ी नसों को गौर से देखा। उसे विक्रम की कहानी पर पूरा भरोसा नहीं था, लेकिन जो उसने देखा था—एक गुलाम द्वारा एलीट मकड़ी को एक वार में काटना—वह साधारण बात नहीं थी। अगर यह लड़का सच में किसी गुप्त तकनीक का जानकार है, तो यह खदान में पत्थर तोड़ने के लिए बहुत कीमती है।

​वह मुस्कुराई। एक ऐसी मुस्कान जिसमें दया नहीं, बल्कि लालच था।

​"मेरा नाम लेडी स्कारलेट है," उसने अपना चाबुक वापस कमर में बांधते हुए कहा। "मैं 'आयरन-क्लिफ सिटी' की मुख्य इन्फोर्सर हूँ। तुम्हारी किस्मत अच्छी है, 'शिष्य'। मुझे बेकार कचरा पसंद नहीं, लेकिन मुझे टूटे हुए खिलौने पसंद हैं... खासकर अगर वे खतरनाक हों।"

​उसने अपने गार्ड्स को इशारा किया। "इस लड़के को उठा लो। और उस बूढ़े को भी। हम शहर वापस जा रहे हैं।"

​विक्रम ने राहत की सांस ली। कम से कम वे मारे नहीं गए।

​गार्ड्स ने विक्रम को किसी बोरे की तरह उठाया और एक 'हवर-क्राफ्ट' (हवा में उड़ने वाला वाहन) में पटक दिया। आचार्य यू को भी उनके बगल में बैठाया गया।

​जैसे ही वाहन खदान से बाहर निकला और आसमान की ओर बढ़ा, विक्रम ने पहली बार इस 'ओरिजिन यूनिवर्स' को सही से देखा।

​खदान के ऊपर का आसमान बैंगनी था, जिसमें दो बड़े सूरज चमक रहे थे। दूर क्षितिज पर, एक विशाल तैरता हुआ शहर (Floating City) दिखाई दे रहा था। वह 'आयरन-क्लिफ सिटी' थी। विशाल धातु की दीवारें, ऊंची मीनारें और हवा में तैरते हुए जहाज—यह नज़ारा किसी सपने जैसा था।

​"हम नर्क से निकल गए," आचार्य यू ने विक्रम के कान में फुसफुसाया। "लेकिन लेडी स्कारलेट... वह उस मकड़ी से भी ज्यादा खतरनाक है। वह तुम्हें अपनी निजी सेना में शामिल करेगी। और वहाँ प्रशिक्षण का मतलब है—मौत।"

​विक्रम ने अपनी आँखें बंद कर लीं और ध्यान लगाने (Meditate) का नाटक किया।

​"चिंता मत करो, आचार्य," विक्रम ने मन ही मन सोचा। "मैं बस समय खरीद रहा हूँ।"

​उसने चुपके से अपनी चेतना (Consciousness) को अपने सिस्टम पर केंद्रित किया।

​[स्थिति रिपोर्ट]

​नाम: विक्रम

​रैंक: नवजात (Newborn)

​ओरिजिन जीन: 14/100

​तकनीक: डोंगशुआन सूत्र (संशोधित), लो-ब्रीदिंग (Level 2), वॉयड स्लेश (अपूर्ण)

​बीस्ट सोल:

​एलीट ब्लू-ब्लड स्पाइडर (कवच): सक्रिय करने पर शारीरिक रक्षा 50% बढ़ती है और जहर प्रतिरोध (Poison Resistance) मिलता है।

​विक्रम ने मन ही मन एक शैतानी मुस्कान बिखेरी। उसे एक एलीट बीस्ट सोल मिल गई थी। पुरानी दुनिया में, एक एलीट बीस्ट सोल मिलना बड़ी बात थी, और यहाँ भी यह कमजोर नहीं होनी चाहिए। सबसे बड़ी बात, लेडी स्कारलेट को इसके बारे में नहीं पता था।

​हवर-क्राफ्ट शहर की दीवारों के ऊपर से गुजरा और एक विशाल महल के आंगन में उतरा।

​"स्वागत है तुम्हारे नए घर में," लेडी स्कारलेट ने उतरते हुए कहा। "इसे 'ब्लड एरेना' (Blood Arena) के बैरक में ले जाओ। इसे खिलाओ-पिलाओ। तीन दिन बाद... मैं देखना चाहती हूँ कि इसकी वह 'छाया तकनीक' अखाड़े में क्या कर सकती है।"

​विक्रम का दिल बैठ गया। अखाड़ा? उसे ग्लेडिएटर बनाया जा रहा था।

​गार्ड्स उसे खींचकर ले जाने लगे। विक्रम ने एक आखिरी बार पीछे मुड़कर देखा। आचार्य यू को दूसरी दिशा में, नौकरों के क्वार्टर की ओर ले जाया जा रहा था। वे अलग हो गए थे।

​अब विक्रम अकेला था। एक नई दुनिया, एक नया शहर, और तीन दिन बाद—मौत का खेल।

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