Cherreads

Void Evil Eye

Shubu_Bhatt
7
chs / week
The average realized release rate over the past 30 days is 7 chs / week.
--
NOT RATINGS
328
Views
Synopsis
यह कहानी सुब्बू (Subbu) की है, जो पृथ्वी का एक अत्यंत प्रतिभाशाली वैज्ञानिक था। अपनी वैज्ञानिक जिज्ञासा और अहंकार में उसने एक ऐसे 'निषिद्ध पोर्टल' (Forbidden Gate) को खोल दिया, जिससे दो दुनियाओं—पृथ्वी और एक जादुई लोक—के बीच महाप्रलयंकारी टक्कर हुई। इस विनाश में करोड़ों निर्दोष लोग मारे गए। सुब्बू को इस अपराध के लिए देवताओं ने 'ईविल आई' (Evil Eye) का श्राप दिया—एक ऐसी दाहिनी आँख जो 'शून्य' (Void) की शक्ति रखती है और विनाश का प्रतीक है। कहानी तब नया मोड़ लेती है जब सुब्बू की रूह 'एथेरियन' (Aetherion) साम्राज्य के मृत राजकुमार वैलेरियस के शरीर में जागती है। वैलेरियस एक 'माना-लेस' (जादुई शक्ति विहीन) राजकुमार था, जिसे उसके अपने भाइयों ने ज़हर देकर एक लावारिस तैरते हुए द्वीप पर मरने के लिए छोड़ दिया था। सुब्बू अब वैलेरियस बनकर इस नए हाई-फैंटेसी संसार में जीवित है, जहाँ उसका एकमात्र साथी उसकी वफादार दासी एलेरा है।
VIEW MORE

Chapter 1 - शून्य का पुनर्जन्म

मृत्यु मुझे ठंडी लगी थी, लेकिन मृत्यु से वापसी किसी खौलते हुए लावे जैसी थी।

जब मेरी आँखें खुलीं, तो सामने वह स्याह काला आसमान नहीं था जिसे मैंने 'महाप्रलय' के दिन देखा था। मेरे चारों ओर एक भव्य महल के खंडहर थे, जिनकी दीवारें किसी चमकते हुए दिव्य पत्थर से बनी थीं। मेरे हाथ... ये मेरे पुराने सूखे और जर्जर हाथ नहीं थे। ये मजबूत थे, एक योद्धा के हाथ, लेकिन अभी खून से लथपथ थे।

मैंने पास पड़े एक टूटे हुए आइने के टुकड़े में अपना चेहरा देखा और सन्न रह गया। मैं अब 'सुब्बू' नहीं था। एक नया ओजस्वी चेहरा, सुनहरे बाल और गहरी नीली आँखें थीं। लेकिन जैसे ही मैंने ध्यान से देखा, मेरी दाहिनी आँख अचानक चीख उठी। उसके अंदर वही पुराना नर्क था—वही काला पोर्टल और वही विनाश।

मैं... मैं कहाँ हूँ? मेरी आवाज गूँजी। यह आवाज भारी थी, जैसे किसी ने सदियों से लोहा चबाया हो।

तभी, मेरे मस्तिष्क में यादों का एक सैलाब आया। इस शरीर का नाम 'राजकुमार वैलेरियस' था। यह 'एथेरियन' साम्राज्य का वह अभागा राजकुमार था, जिसे उसके ही भाइयों ने राजसिंहासन के लालच में जहर देकर इस वीरान द्वीप पर मरने के लिए छोड़ दिया था। लेकिन उन्हें ज्ञात नहीं था कि मृत्यु के उस अंतिम क्षण में, इस खाली शरीर को भरने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा पापी मैं आ पहुँचा हूँ।

खिड़की से बाहर देखते ही मेरी साँसें थम गईं। यह 'सताल' से कहीं अधिक भव्य और डरावनी दुनिया थी। आकाश में विशालकाय द्वीप तैर रहे थे, जिनसे दूधिया झरने नीचे बादलों में गिर रहे थे। हवा में एक अजीब सी जादुई गूँज, एथरिक रेजोनेंस थी। यहाँ विज्ञान का अस्तित्व नहीं था, यहाँ केवल 'शुद्ध जादुई ऊर्जा' का शासन था।

मैंने महसूस किया कि मेरी 'ईविल आई' इस नए संसार की जादुई ऊर्जा को ऐसे सोख रही थी जैसे कोई भूखा सिंह अपना शिकार ढूँढ रहा हो। अचानक, वही चमकते हुए 'वॉइड ईकोज' मेरे चारों ओर प्रकट हो गए। इस बार वे डर नहीं रहे थे, बल्कि घुटनों पर थे।

स्वागत है, हमारे नए सम्राट, उनकी फुसफुसाहट मेरे दिमाग में किसी प्राचीन संगीत की तरह गूँजी।

मुझे अब समझ आया। मैं यहाँ सिर्फ बचने नहीं आया हूँ। देवताओं ने जिसे मेरा 'श्राप' कहा था, वही इस नए संसार की सबसे बड़ी शक्ति है। मैंने दो दुनियाओं को तोड़ा था, अब मैं इस तीसरी दुनिया को अपने कदमों में झुकाऊँगा। राजकुमार वैलेरियस मर चुका था, लेकिन 'ईविल आई' का शासक जाग गया था। मेरे सामने तैरते द्वीप थे, रूह पर विनाश का निशान था, और दिल में वह प्रतिशोध जो देवताओं के तख्त को उखाड़ फेंकने के लिए पर्याप्त था।

मैंने मुट्ठी भींची और हवा में एक काली दरार पैदा हुई। एथेरियन को अब पता चलने वाला था कि उसने 'शैतान' को जीवनदान दिया है।

महल के ठंडे पत्थरों पर लेटे हुए मुझे कई घंटे बीत चुके थे। राजकुमार वैलेरियस के शरीर में उठने वाला हर दर्द मुझे याद दिला रहा था कि मैं अब 'अमर' ईविल आई नहीं, बल्कि एक हाड-मांस का कमजोर इंसान हूँ। जहर का असर अभी भी मेरी नसों में सुइयों की तरह चुभ रहा था। मैंने उठने की कोशिश की, पर मेरे हाथ कांप गए।

धिक्कार है। मैं फुसफुसाया। इतनी कमजोर देह?

तभी, गलियारे में भारी कदमों की आहट सुनाई दी। लोहे के जूतों की आवाज पत्थर पर गूँज रही थी। कोई यहाँ आ रहा था—और उसकी नीयत अच्छी नहीं थी।

वैलेरियस? अभी तक मरा नहीं क्या? एक करकश आवाज आई।

यह कैप्टन ड्रैगो था—वही सिपाही जिसे मेरे भाइयों ने मेरा गला रेतने के लिए भेजा था। वह अंदर दाखिल हुआ, उसके हाथ में एक भारी कुल्हाडी थी जिस पर अभी भी ताजा खून लगा था। मुझे जिंदा देखकर उसकी आँखों में हैरत और फिर नफरत उभरी।

असंभव! मैंने खुद तुम्हें वह जहर पीते देखा था, ड्रैगो गुर्राया।

मेरे दिमाग ने तुरंत काम करना शुरू किया। सुब्बू के रूप में मेरे पास विज्ञान का ज्ञान था, और वैलेरियस के रूप में इस दुनिया की धुंधली यादें थीं। मैंने अपनी दाहिनी आँख ईविल आई में एक अजीब सी हलचल महसूस की। वह एथर जादुई ऊर्जा को सोखना चाहती थी, पर मेरा शरीर तैयार नहीं था।

मैंने पास पड़ी एक टूटी हुई छडी उठाई और दीवार का सहारा लेकर खडा हुआ। ड्रैगो, तुम एक राजकुमार पर हाथ उठाने की जुर्रत कर रहे हो? मेरी आवाज में वह पुराना दबदबा था, जो सदियों तक 'विनाश का गवाह' बनने से आया था।

ड्रैगो हँसा। राजकुमार? तुम अब केवल एक लाश हो जिसे दफनाना बाकी है।

वह मेरी ओर झपटा। उसकी कुल्हाडी हवा को चीरती हुई आई। अगर मैं पहले वाला सुब्बू होता, तो मैं बस एक पलक झपकाता और वह राख बन जाता। पर अभी? अभी मैं हिल भी नहीं पा रहा था। मैंने अंतिम क्षण में खुद को दाईं ओर झोंका। कुल्हाडी फर्श को चीरते हुए धँस गई। उसी पल, मेरी 'ईविल आई' ने महल की दीवार में लगे एक पुराने 'एथर क्रिस्टल' से ऊर्जा खींची।

एक काला धुंआ मेरी हथेली से निकला—छोटा, अनियंत्रित और हिंसक। वह धुंआ ड्रैगो की कुल्हाडी के लोहे से टकराया। लोहा अचानक ऐसे पिघलने लगा जैसे वह मोम हो। ड्रैगो चिल्लाया और पीछे हटा। उसका हाथ बुरी तरह झुलस गया था।

यह... यह क्या जादू है? तुम तो जादुई रूप से अक्षम, माना-लेस थे! ड्रैगो के चेहरे पर डर साफ था।

लेकिन उस एक छोटे से हमले ने मेरी सारी ऊर्जा सोख ली। मेरा विजन धुंधला होने लगा और नाक से खून बहने लगा। मेरा दिल इतनी तेज धड़क रहा था मानो सीना फाड़कर बाहर आ जाएगा। शिट! अगर मैंने एक और हमला किया, तो यह शरीर फट जाएगा, मैंने सोचा।

जाओ यहाँ से ड्रैगो, मैंने अपने खून को पोंछते हुए कहा, अपनी आवाज को स्थिर रखने की पूरी कोशिश की। अपने स्वामियों से कहना कि वैलेरियस वापस आ गया है। और इस बार वह अकेले नहीं आया।

ड्रैगो अपनी टूटी कुल्हाडी लेकर वहाँ से भाग खडा हुआ। उसे लगा कि मैं बहुत शक्तिशाली हो गया हूँ, पर सच तो यह था कि जैसे ही वह गया, मैं दोबारा जमीन पर गिर पडा। मेरी आँख से काला खून बह रहा था।

मुझे समझ आ गया था कि भले ही मुझे वॉइड की शक्ति मिली है, पर यह पात्र शरीर अभी इसे संभालने के लिए तैयार नहीं है। यह वेसल अभी बहुत कच्चा है। अगर मैंने दोबारा वॉइड को यूज किया तो शायद राख में बदल जाऊँगा।

मैं हाँफते हुए मुस्कुराया। तो... मुझे फिर से शुरुआत करनी होगी। खरोंच से। इस दुनिया के नियमों को सीखना होगा।

महल के बाहर, एथेरियन के तैरते हुए द्वीप चाँद की रोशनी में चमक रहे थे। उन द्वीपों पर वे देवता बैठे थे जिन्होंने मुझे श्राप दिया था। वे महल में ऐश कर रहे थे, यह सोचकर कि मैं खत्म हो गया हूँ। पर मैं अभी शुरू हुआ था। वैलेरियस के रूप में, मैं इस दुनिया के सबसे निचले स्तर से ऊपर उठूँगा। और जब मैं शिखर पर पहुँचूँगा, तो देवताओं के पास छिपने के लिए कोई जगह नहीं होगी।