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Chapter 1 - THE LAST NIGHT

The Last Night

Writer: Sahil Khan

रात के करीब 11 बज रहे थे। शहर की सड़कों पर सन्नाटा छाया हुआ था। ठंडी हवा चल रही थी और आसमान में बादल धीरे-धीरे चाँद को ढक रहे थे। ऐसा लग रहा था जैसे आज की रात किसी खास रहस्य को अपने अंदर छुपाए बैठी हो।

आर्यन अपने कमरे की खिड़की के पास खड़ा था। उसकी आँखों में अजीब सी बेचैनी थी। आज की रात उसके लिए साधारण नहीं थी, क्योंकि आज वह फैसला लेने वाला था जो उसकी पूरी जिंदगी बदल सकता था।

मोबाइल की स्क्रीन पर बार-बार एक ही नाम चमक रहा था — रिया।

रिया… वही लड़की जिसने आर्यन की जिंदगी में खुशियाँ भी दी थीं और दर्द भी।

आर्यन ने गहरी साँस ली और कॉल रिसीव किया।

"हेलो…" रिया की धीमी आवाज आई।

"हां रिया… बोलो।"

कुछ पल तक दोनों तरफ खामोशी रही।

फिर रिया बोली, "क्या तुम सच में आज जा रहे हो?"

आर्यन ने खिड़की से बाहर देखा। सड़क पर सिर्फ एक स्ट्रीट लाइट जल रही थी।

"हाँ… शायद यही सही है।"

रिया की आवाज थोड़ी कांप गई।

"लेकिन बिना मुझसे मिले?"

आर्यन कुछ सेकंड चुप रहा। फिर बोला,

"अगर तुमसे मिला… तो शायद मैं जा नहीं पाऊँगा।"

रिया चुप हो गई।

दोनों के बीच हजारों यादें थीं — कॉलेज के दिन, साथ बिताए पल, हँसी, सपने… सब कुछ।

लेकिन जिंदगी हमेशा वैसी नहीं होती जैसी हम चाहते हैं।

आर्यन ने अपना बैग उठाया। उसमें सिर्फ कुछ कपड़े और एक डायरी थी। वही डायरी जिसमें उसने अपने सारे सपने लिखे थे।

घड़ी ने 12 बजने का इशारा दिया।

यह उस शहर में उसकी आखिरी रात थी।

पुरानी यादें

आर्यन की नजर अचानक टेबल पर रखी एक फोटो पर गई। उसमें वह और रिया कॉलेज के फेस्ट में मुस्कुरा रहे थे।

उसे याद आया जब पहली बार वह रिया से मिला था।

कॉलेज की लाइब्रेरी में।

रिया किताब ढूंढ रही थी और गलती से सारी किताबें गिर गई थीं। आर्यन ने मदद की और वहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई।

धीरे-धीरे दोस्ती प्यार में बदल गई।

दोनों ने साथ में बहुत सपने देखे थे।

लेकिन जिंदगी ने अचानक मोड़ ले लिया।

आर्यन के पिता की तबीयत खराब हो गई और घर की सारी जिम्मेदारी उस पर आ गई। उसे शहर छोड़कर दूर नौकरी के लिए जाना पड़ा।

रिया चाहती थी कि वह रुके।

लेकिन आर्यन जानता था — अगर वह नहीं गया तो उसका परिवार मुश्किल में पड़ जाएगा।

आधी रात

आर्यन घर से बाहर निकला।

सड़क बिल्कुल खाली थी।

वह धीरे-धीरे बस स्टैंड की तरफ चलने लगा।

हर कदम के साथ उसकी यादें भारी होती जा रही थीं।

तभी पीछे से किसी ने आवाज लगाई।

"आर्यन!"

वह तुरंत मुड़ा।

रिया उसके सामने खड़ी थी।

उसकी आँखें लाल थीं जैसे वह बहुत देर से रो रही हो।

आर्यन हैरान रह गया।

"तुम यहाँ…?"

रिया ने कहा,

"तुम सच में बिना मिले चले जाते?"

आर्यन कुछ बोल नहीं पाया।

रिया उसके पास आई और बोली,

"अगर यह आखिरी रात है… तो कम से कम सच बोलकर जाओ।"

आर्यन की आँखें नम हो गईं।

"सच यह है कि मैं आज भी तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।"

रिया की आँखों से आँसू गिरने लगे।

"तो फिर जा क्यों रहे हो?"

आर्यन ने धीरे से कहा,

"क्योंकि कभी-कभी प्यार से ज्यादा जरूरी जिम्मेदारियाँ होती हैं।"

कुछ पल तक दोनों चुप रहे।

हवा और ठंडी हो गई।

आखिरी फैसला

बस आने में सिर्फ 10 मिनट बाकी थे।

रिया ने धीरे से कहा,

"क्या तुम वापस आओगे?"

आर्यन ने आसमान की तरफ देखा।

"मुझे नहीं पता… लेकिन अगर किस्मत ने चाहा तो जरूर।"

रिया ने अपनी जेब से एक छोटा सा कागज निकाला।

"यह क्या है?" आर्यन ने पूछा।

"एक वादा।"

उस कागज पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी —

"अगर हम सच्चे हैं, तो रास्ते फिर मिलेंगे।"

आर्यन ने कागज अपनी डायरी में रख लिया।

बस की हेडलाइट दूर से दिखाई देने लगी।

समय खत्म हो रहा था।

रिया ने मुस्कुराने की कोशिश की।

"जाओ… वरना बस छूट जाएगी।"

आर्यन बस में चढ़ गया।

खिड़की से उसने आखिरी बार रिया को देखा।

रिया वहीं खड़ी थी।

लेकिन इस बार उसके चेहरे पर आँसू नहीं थे।

बस एक हल्की सी मुस्कान थी।

जैसे वह जानती हो — यह अंत नहीं है।

एक साल बाद

एक नया शहर।

नई जिंदगी।

आर्यन अब एक सफल लेखक बन चुका था।

उसकी किताब का नाम था —

"The Last Night"

बुक लॉन्च के दिन बहुत लोग आए थे।

लेकिन भीड़ में एक चेहरा ऐसा था जिसे देखकर आर्यन की धड़कन रुक गई।

वह रिया थी।

रिया उसके सामने आकर मुस्कुराई।

"मैंने कहा था ना… रास्ते फिर मिलेंगे।"

आर्यन मुस्कुरा दिया।

शायद कुछ कहानियों का अंत नहीं होता।

वे बस एक नई शुरुआत बन जाती हैं।

TO BE CONTINUED...

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