बिल्ली और चूहे की कहानी
बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक बड़े से पेड़ के नीचे एक चूहा अपने बिल में रहता था और उसी पेड़ के ऊपर एक बिल्ली रहती थी। बिल्ली और चूहे दुश्मन होने के कारण, बिल्ली के नीचे उतरने पर चूहा हमेशा डरकर अपने बिल में छिप जाता था।
संकट का समय
हर रात एक शिकारी जंगल में जानवरों के लिए जाल बिछाता था। एक दिन, बदकिस्मती से बिल्ली उसी शिकारी के जाल में फंस गई। बिल्ली को जाल में फंसा देखकर चूहे को बहुत खुशी हुई और वह निडर होकर आज़ादी से घूमने लगा।
चूहे की चतुराई
तभी, एक नेवला चूहे को खाने के लिए आगे बढ़ा। जान जोखिम में देखकर चूहे को एक उपाय सूझा। वह झट से जाल में फंसी बिल्ली के पास गया और बोला, "मैं तुम्हें इस जाल से बचा सकता हूँ, लेकिन बदले में तुम्हें मुझे नहीं खाना होगा"।
मौत के डर से बिल्ली ने तुरंत चूहे की बात मान ली। चूहा निडर होकर जाल के अंदर बिल्ली के बगल में बैठ गया। चूहों को बिल्ली के पास देखकर नेवले की हिम्मत उसे पकड़ने की नहीं हुई और वह वापस चला गया।
अंतिम सबक
नेवले के जाते ही, चूहा जाल से बाहर आया और बिल्ली से कहा कि उसने उसके प्राण बचाए हैं, इसलिए अब वे दोनों अच्छे मित्र की तरह नहीं रह सकते। चूहे ने कहा कि दुश्मन से दोस्ती मुसीबत लाती है, उसने बिल्ली की मदद की है इसलिए अब हिसाब बराबर हो गया।
बिल्ली ने अपनी जान बची देख चूहे को जाने दिया। चूहा तुरंत अपने बिल में घुस गया। बिल्ली को समझ आ गया कि स्वार्थ के लिए की गई दोस्ती ज़्यादा दिन नहीं चलती।
कहानी की सीख (Moral of the Story)
मुसीबत में चतुरता से काम लेना चाहिए।
दुष्ट या दुश्मन पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
बुद्धिमान व्यक्ति अपने ज्ञान का सही इस्तेमाल करता है। I hope aapko yeh story kaafi achi lagi hoh isi tarah ke story mai aapke liye laata rahunga milte hai kal agli story ke saath aapka pyaara rabi
