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Chapter 4 - band darvajon ki gunj

आर्यन के हाथ में वो पुरानी डायरी थरथरा रही थी। बाहर बारिश अब और तेज़ हो चुकी थी, जैसे कुदरत उसे उस हवेली के अंदर ही कैद कर देना चाहती हो। डायरी का आखिरी पन्ना आधा फटा हुआ था, लेकिन जो शब्द वहां लिखे थे, उन्होंने आर्यन के रोंगटे खड़े कर दिए: "वो आइने में नहीं, परछाईं में इंतज़ार करता है।"

तभी, ऊपर वाली मंज़िल से किसी के भारी कदमों से चलने की आवाज़ आई। धप... धप... धप...

1. अनचाहा साया

आर्यन ने अपनी टॉर्च ऊपर की ओर घुमाई। सीढ़ियों पर जमी धूल में उसे ताज़ा जूतों के निशान दिखे। पर ये मुमकिन नहीं था—हवेली पिछले चालीस सालों से बंद थी। वो हिम्मत जुटाकर ऊपर की ओर बढ़ा। जैसे-जैसे वो बढ़ रहा था, हवा का तापमान गिरता जा रहा था। उसे अपनी ही सांसें सफेद धुएं की तरह दिखने लगीं।

2. गलियारे का रहस्य

ऊपर पहुँचते ही उसने देखा कि गलियारे के अंत में एक दरवाज़ा आधा खुला है। वहां से एक हल्की नीली रोशनी छन कर बाहर आ रही थी। आर्यन दबे पाँव वहां पहुँचा। कमरे के अंदर सन्नाटा इतना गहरा था कि उसे अपनी धड़कनें किसी नगाड़े की तरह सुनाई दे रही थीं।

उसने जैसे ही दरवाज़ा पूरा खोला, उसकी चीख गले में ही दब गई। कमरे के बीचों-बीच एक पुरानी मेज पर वही टॉर्च जल रही थी, जो आर्यन ने आधे घंटे पहले नीचे हॉल में खो दी थी। लेकिन अजीब बात ये थी... टॉर्च के बगल में एक ताज़ा चाय का कप रखा था, जिसमें से अभी भी भाप निकल रही थी।

3. आइने की सच्चाई

आर्यन ने कमरे के बड़े से आदमकद आइने की ओर देखा। उसकी खुद की परछाईं वहां मौजूद थी, लेकिन जैसे ही उसने मुड़ने की कोशिश की, उसे महसूस हुआ कि आइने वाला "आर्यन" अभी भी वहीं खड़ा उसे घूर रहा है।

तभी कमरे का दरवाज़ा अपने आप ज़ोर से बंद हो गया। बाहर से किसी के हंसने की धीमी आवाज़ आई—वही आवाज़ जो उसने बचपन के उन धुंधले ख्वाबों में सुनी थी। दीवार पर टंगी पुरानी घड़ी अचानक चलने लगी, लेकिन उसकी सुइयां पीछे की तरफ भाग रही थीं।

सस्पेंस की पराकाष्ठा:

आर्यन ने भागकर दरवाज़ा खोलने की कोशिश की, पर वो बाहर से लॉक हो चुका था। तभी उसने खिड़की के कांच पर भाप से उभरते हुए कुछ शब्द देखे: "तुम वापस क्यों आए, आर्यन? खेल तो अभी शुरू भी नहीं हुआ।"

क्या आप चाहते हैं कि मैं चैप्टर 5 में उस नकाबपोश चेहरे का खुलासा करूँ जो आर्यन का पीछा कर रहा है?

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